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मैं दुखी क्यों हूँ ? मोटिवेशनल स्टोरी

कई  बार हमारी ज़िंदगी में उतार चढ़ाव आते रहते है जो की एक गहरा प्रभाव छोड़ कर जाते है।  और हम अक्सर यह कहते है की यार मेरे ही साथ ऐसा क्यों होता है, मैंने किसी का क्या बिगाड़ा  है ? और फिर हम मन से अपने आपको दुखी मान लेते है।

नमस्कार दोस्तों आज हम बिज़नेस सीरीज से थोड़ा हटकर आपको मोटिवेशनल जानकारी देने वाले है जो आपकी ज़िंदगी में बहुत ही उपयोगी साबित  होगी।  दोस्तों अगर आपने अभी तक हमे सब्सक्राइब नहीं किया है तो अभी तुरंत कर दे यह बिलकुल फ्री है।  सब्सक्राइब करने से आपको यह फायदा होगा की जब भी हम किसी भी पोस्ट को अपनी साइट में डालेंगे वो सबसे पहले आपके पास मेल में आएगा और उसको पढ़ कर आपके अंदर जोश जग जायेगा।

 

आज हम आपको एक कहानी बताने वाले है जिसने मेरी ज़िंदगी में भी बहुत प्रभाव डाला है।  2009 में जब में दिल्ली से रामेश्वरम की और जा रहा था तो एक अजीब सी घटना हुई थी।  हम सभी सदस्य नए थे उस जगह जाने के लिए।  अचानक मथुरा से एक बुजुर्ग व्यक्ति हमारे साथ बैठे और उन्होंने एक ही सवाल किया की रामेश्वरम जा रहे हो ना ? हमने उनकी और देखा और कहा हां आपको कैसे पता ? उन्होंने कहा की यह तो एक संजोग है में भी वही जा रहा हु लेकिन आप मदुरै उतरे और वह पर मीनाक्षी मंदिर जरूर जाये हमने उनसे कहा की हम यहाँ के लिए नए है तो आप ही हमें रास्ता दिखाए।  उन्होंने कहा जैसी भगवान की इच्छा।

 

कुछ देर के बाद एक लोकल व्यक्ति हमारे  पास आकर बैठ गया और एक ही सवाल पूछा की मुझे अपने कल की चिंता है की कल मेरे बच्चे कैसे रहेंगे उनको कौन पालेगा, मेरी तन्खवा भी बहुत कम है और यही सोच कर में दुखी रहता हु ?

तो उन बुजुर्ग व्यक्ति ने एक कहानी सुनाई की एक बार एक गांव में बहुत धनी व्यक्ति रहता था जिसके पास बहुत सारे पैसे थे।  उसके पास इतने पैसे थे की उसकी सात पीढ़ी तक उस पैसो से आराम से रह सकती थी।  एक दिन उस व्यक्ति से किसी ने पूछा की अगर तुम्हे कभी कुछ हो जाये तो तुम्हारी संतान का क्या होगा ? यह सुनकर उस व्यक्ति के हाथ पाव फूलने लग गए… यह सोचते सोचते वो फिर बीमार रहने लगा बहुत से डॉक्टर को दिखाया लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा।  एक दिन उसकी पत्नी ने उससे पूछा की आपको क्या तकलीफ है उसने सारी बात बताई यह सुनकर उसकी पत्नी भी अगले दिन से बीमार रहने लगी।

 

बात इतनी से नहीं थी जब उसके घर में यह बात हर एक व्यक्ति को पता चली तो सभी व्यक्ति बीमार रहने लग गए।  पूरा गांव परेशान था  की अचानक इस व्यक्ति के परिवार को क्या हो गया ? एक दिन एक व्यक्ति ने पूछा की भाई आपको और आपके परिवार को यह क्या हो गया ? उस व्यक्ति ने अपनी सारी बात बताई…. उस व्यक्ति ने एक बात बोली की हमारे  यहाँ एक बहुत ही पहुंचे विद्वान आये हुए है आप उनसे अपनी समस्या बोले ?

 

धनी व्यक्ति चला उस विद्वान से मिलने और कहा की में दुखी हु ? मेरी यह समस्या है की अगर मुझे कुछ हो गया तो मेरे परिवार का क्या होगा ? तो वो विद्वान व्यक्ति ने थोड़ा मुस्कुराया यह देख धनी व्यक्ति बोला की  आप ऐसे क्यों मुस्कुरा रहे हो ? क्या मेरी स्थिति आपको मज़ाक लगती है ? विद्वान व्यक्ति बोलै की तुम दुखी इसलिए हो क्योकि तुम्हे लगता है की सिर्फ तुम ही पैसे कमाना जानते हो और जब तुम्हे कुछ हो जाये तो तुम्हारे परिवार का क्या होगा यह सोच कर तुम बीमार रहने लगे।

 

विद्वान व्यक्ति ने कहा जिसने आज दिया है वो कल भी देगा….. देने वाला वो ईश्वर है और पाने वाले हम।  विद्वान व्यक्ति ने कहा की आज से चिंता को छोड़ कर तुम अपनी संतान को कोई काम सिखाओ जिससे वो खुद अपने पैरो में खड़ा होना सीख ले। इस जीवन का नियम ही यही है जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु भी निश्चिंत है तो इसमें चिंता क्यों करना ?

यह सुनकर वो धनी व्यक्ति खड़ा हुआ और उस विद्वान के पैरो में गिर गया और कहा की यह ज्ञान मेरे लिए बहुत ही उपयोगी है आपने मुझे सही दिशा दिखाई है में सदा ही आपका आभारी रहूँगा।

 

दोस्तों आपको यह कहानी कैसी लगी मुझे लगता है की अब आपके दुःख भी कम हो जायेंगे।  इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे ताकि सभी के दुःख कम हो सके धन्यवाद।

 

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